काँग्रेसी राजघराने का भगवा राजकुमार

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JNI NEWS : 20-12-2014 | By : alok | In : अमेठी, सुर्खियां

रिपोर्ट-मेराज़ ख़ान (9648070088)

कहानी पुरानी है पर किरदार नए हैं। एक तरफ पिता होंगे तो दूसरी तरफ पुत्र। सियासत में ऐसा जमाने से होता आया है पर 1200 साल पुराने अमेठी राजघराने के लिहाज से सब कुछ नया है। (अमेठी राजमहल) पर अब तक कांग्रेस का तिरंगा लहराता रहा है लेकिन अब भाजपा का परचम लहराने को है। कांग्रेस सांसद और अमेठी के महाराज कहे जाने वाले संजय सिंह के बेटे अनंत विक्रम सिंह ने पारिवारिक संघर्ष के बाद पिता के खिलाफ लगभग सियासी बगावत भी कर दी है। वह 21 दिसम्बर को लखनऊ स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में अपने समर्थकों समेत पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं।

 

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फिलवक्त भले ही कोई बात खुलकर नहीं कही जा रही लेकिन अनंत विक्रम का यह कदम पिता से सियासी विरासत छीन लेने की बुनियाद के रूप में देखा जा रहा है। मसले पर संजय सिंह की चुप्पी खुद ब खुद कई सवाल खड़े कर रही है। सियासी चुनौती देने की यह बुनियाद पिछले सितम्बर में ही तब पड़ गई थी, जब अनंत विक्रम सिंह अपनी मां और संजय सिंह की पत्नी रानी गरिमा सिंह के साथ भूपति भवन जा डटे थे। पहले रानी गरिमा सिंह को वहां नहीं रह पा रही थीं। इसे लेकर कई दिनों तक धमाचौकड़ी और खूनी संघर्ष भी हुआ। इस मसले पर अनंत विक्रम को क्षेत्र से भरपूर नैतिक और भौतिक समर्थन मिला। सूबे में राज कर रही समाजवादी पार्टी ने इस मसले पर जब दबे पांव टांग अड़ाई तो भाजपा भी सक्रिय हुई। अनंत विक्रम का मन टटोला गया। उन्हें भी सियासत का यह दांव मुफीद लगा और आखिरकार तय हो गया कि वह भाजपा में शामिल होकर अमेठी में पार्टी का कामकाज देखेंगे, जहां मौजूदा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने चुनाव लड़कर कार्यकर्ताओं को एकजुट कर रखा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा को अनंत विक्रम के रूप में वह चेहरा मिल रहा है जो कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के खिलाफ मजबूती से खड़ा हो सकता है और उनका खूंटा उखाडऩे के लिए दमदार साबित हो सकता है। अनंत के स्थानीय और राजघराने से होने के कारण कांग्रेसी उन पर किसी तरह के सवाल भी नहीं खड़ा कर सकेंगे। भाजपा में जाने को लेकर अनंत विक्रम और उनके समर्थक खासे उत्साहित हैं। अनंत कहते भी हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी से बात हुई है। भाजपा से हमारा पुराना नाता है क्योंकि उनके दादा रणंजय सिंह के आरएसएस से वैचारिक रिश्ते रहे हैं। अच्छा होता कि महाराज (पिता संजय सिंह) उनकी अंगुली पकड़कर सियासी दांव सिखाते लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा। पर इसका उन्हें कोई अफसोस नहीं है। अमिता सिंह के सवाल पर अनंत विक्रम ने कहा कि उनका ऐसा दर्जा नहीं है कि उनके बारे में वह कोई टिप्पणी करें। क्षेत्र की जनता काफी समय से चाह रही थी कि मैं राजनीति में सक्रिय होऊं, इसलिए मैं आ रहा हूं।

पाठक की प्रतिक्रिया (1)

बहुत अच्छी खबर है

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